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Surah Baqarah Last 2 Ayat in Hindi – अरबी, हिंदी अनुवाद और फज़ीलत

✍ Huzaifa Khan 📅 August 15, 2026
Surah Baqarah last 2 ayat 285-286 Arabic calligraphy image
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Surah Baqarah Last 2 Ayat in Hindi

Surah Baqarah ki last 2 ayat (आयत 285-286) कुरान की सबसे अज़ीम आयतों में से हैं। इन्हें रात को सोने से पहले पढ़ना नबी करीम ﷺ की सुन्नत है और इनकी बहुत बड़ी फज़ीलत (महत्व) है। नीचे आपको अरबी टेक्स्ट, हिंदी तर्जुमा (अनुवाद), उच्चारण (transliteration) और इनकी फज़ीलत — सब कुछ एक ही जगह मिलेगा।


Surah Baqarah Last 2 Ayat — संक्षिप्त जवाब

सूरह बक़रा की आखिरी 2 आयतें (2:285 और 2:286) ईमान के बुनियादी उसूलों — अल्लाह, फ़रिश्तों, किताबों और रसूलों पर यक़ीन — को बयान करती हैं और अल्लाह से माफ़ी, रहमत और मदद माँगने की दुआ पर खत्म होती हैं। हदीस-ए-पाक के मुताबिक जो कोई रात को यह दोनों आयतें पढ़ता है, वह उसके लिए काफी (sufficient) हो जाती हैं यानी उसे उस रात के लिए हिफाज़त और बरकत मिल जाती है।


Surah Baqarah Last 2 Ayat in Arabic (आयत 285-286)

آمَنَ الرَّسُولُ بِمَا أُنْزِلَ إِلَيْهِ مِنْ رَبِّهِ وَالْمُؤْمِنُونَ ۚ كُلٌّ آمَنَ بِاللَّهِ وَمَلَائِكَتِهِ وَكُتُبِهِ وَرُسُلِهِ لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْ رُسُلِهِ ۚ وَقَالُوا سَمِعْنَا وَأَطَعْنَا ۖ غُفْرَانَكَ رَبَّنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ

لَا يُكَلِّفُ اللَّهُ نَفْسًا إِلَّا وُسْعَهَا ۚ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَعَلَيْهَا مَا اكْتَسَبَتْ ۗ رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِنْ نَسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِنْ قَبْلِنَا ۚ رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ ۖ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۚ أَنْتَ مَوْلَانَا فَانْصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

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Surah Baqarah Last 2 Ayat — उच्चारण (Transliteration)

Ayat 285: Aamanar-Rasoolu bimaa unzila ilayhi mir-Rabbihee wal-mu’minoon(a), kullun aamana billaahi wa malaa’ikatihee wa kutubihee wa Rusulih(i), laa nufarriqu baina ahadim-mir-Rusulih(i), wa qaaloo sami’naa wa ata’naa ghufraanaka Rabbanaa wa ilaikal-maseer(u).

Ayat 286: Laa yukalliful-laahu nafsan illaa wus’ahaa, lahaa maa kasabat wa ‘alayhaa mak-tasabat, Rabbanaa laa tu’aakhiznaa in naseenaa aw akhta’naa, Rabbanaa wa laa tahmil ‘alainaa isran kamaa hamaltahoo ‘alal-lazeena min qablinaa, Rabbanaa wa laa tuhammilnaa maa laa taaqata lanaa bih(i), wa’fu ‘annaa waghfir lanaa warhamnaa, Anta maulaanaa fansurnaa ‘alal-qawmil-kaafireen(a).


Surah Baqarah Last 2 Ayat in Hindi (हिंदी अनुवाद)

आयत 285 का हिंदी तर्जुमा

रसूल उस चीज़ पर ईमान लाया जो उसके रब की तरफ़ से उस पर उतारी गई, और सब ईमान वाले भी उस पर ईमान लाए। ये सब अल्लाह, उसके फ़रिश्तों, उसकी किताबों और उसके रसूलों पर ईमान रखते हैं — (और कहते हैं) “हम उसके रसूलों में से किसी के बीच फ़र्क़ नहीं करते।” और वे कहते हैं, “हमने सुना और हमने मान लिया। ऐ हमारे रब! हम तुझसे बख़्शिश माँगते हैं, और हमें तेरी ही तरफ़ लौटना है।”

आयत 286 का हिंदी तर्जुमा

अल्लाह किसी भी जान पर उसकी ताक़त से ज़्यादा बोझ नहीं डालता। उसे उसी का फल मिलेगा जो उसने कमाया, और उसी का नुक़सान होगा जो उसने किया। “ऐ हमारे रब! अगर हम भूल जाएँ या हमसे ग़लती हो जाए तो हमें ना पकड़। ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल जो तूने हमसे पहले के लोगों पर डाला था। ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल जिसे उठाने की ताक़त हममें नहीं है। हमें माफ़ कर दे, हमें बख़्श दे और हम पर रहम फ़रमा। तू ही हमारा मौला (सरपरस्त) है, इसलिए काफ़िर क़ौम के मुक़ाबले में हमारी मदद फ़रमा।”

Surah Baqarah last 2 ayat Hindi translation infographic

Surah Baqarah Last 2 Ayat की फज़ीलत (Benefits)

इन आयतों की फज़ीलत क़ुरान की सबसे मशहूर फ़ज़ीलतों में से एक है, जो सही हदीसों से साबित है:

  • हज़रत अबू मसऊद (रज़ि.) रिवायत करते हैं कि नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: जो शख़्स रात को सूरह बक़रा की आख़िरी दो आयतें पढ़ ले, वे उसके लिए काफ़ी हो जाती हैं।” (सहीह बुख़ारी: 5009, सहीह मुस्लिम: 807)
  • इमाम नवावी (रह.) के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि यह आयतें रात की नमाज़ (क़ियाम) के बदले काफ़ी हो जाती हैं, या यह शैतान और नुक़सान से हिफाज़त का ज़रिया बन जाती हैं — या फिर दोनों।
  • यही रिवायत सुनन अबू दाऊद (1397) और सुनन नसाई (451) में भी सही सनद से मौजूद है।
  • कुछ रिवायतों के मुताबिक़ यह दोनों आयतें अल्लाह के अर्श के नीचे से एक ख़ज़ाने से नबी करीम ﷺ को अता की गईं।

इसीलिए बहुत से मुस्लिम रोज़ाना ईशा की नमाज़ के बाद, सोने से पहले, इन आयतों को पढ़ने की आदत बनाते हैं — हिफाज़त, बरकत और सुकून की नीयत से।

Reciting Surah Baqarah last 2 ayat before sleeping at night

Surah Baqarah Last 2 Ayat कब और कैसे पढ़ें

  1. समय: ईशा की नमाज़ के बाद, सोने से ठीक पहले पढ़ना सबसे बेहतर माना गया है, क्योंकि हदीस में “रात” (लैलतन) का ज़िक्र आया है।
  2. तरीक़ा: पहले अरबी टेक्स्ट को सही तजवीद के साथ पढ़ें, फिर अगर अरबी समझ न आए तो हिंदी तर्जुमे पर ग़ौर करें ताकि दुआ में दिल भी शामिल हो।
  3. निरंतरता: इसे रोज़ की आदत बना लें — हदीसों में इसका अज्र और हिफाज़त हर रात के लिए बताई गई है, इसलिए एक बार पढ़ना काफ़ी नहीं, इसे मामूल (रोज़ाना का वज़ीफ़ा) बना लें।
  4. याद करना: शुरुआत में ट्रांसलिट्रेशन (उच्चारण) की मदद लें, धीरे-धीरे अरबी टेक्स्ट देखकर पढ़ने की आदत डालें ताकि तिलावत सही मख़रज के साथ हो।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल: सूरह बक़रा की आख़िरी 2 आयतें कौन सी हैं? जवाब: सूरह बक़रा की आख़िरी 2 आयतें, आयत नंबर 285 और 286 हैं, जो सूरह बक़रा (कुरान की दूसरी और सबसे बड़ी सूरह) पर खत्म होती हैं।

सवाल: क्या Ayatul Kursi और Surah Baqarah last 2 ayat एक ही हैं? जवाब: नहीं, दोनों अलग-अलग हैं। आयतुल कुर्सी सूरह बक़रा की आयत नंबर 255 है, जबकि “last 2 ayat” आयत 285 और 286 हैं — ये सूरह के बिल्कुल आख़िर में आती हैं।

सवाल: सूरह बक़रा की आख़िरी 2 आयतें पढ़ने का सही वक़्त क्या है? जवाब: हदीस के मुताबिक़ इन्हें रात में पढ़ना बताया गया है, और आमतौर पर इसे ईशा की नमाज़ के बाद सोने से पहले पढ़ा जाता है।

सवाल: क्या इन आयतों को हिंदी अनुवाद के साथ पढ़ना सही है? जवाब: तिलावत हमेशा अरबी में की जाती है, लेकिन मतलब समझने के लिए हिंदी (या अपनी ज़बान) में तर्जुमा पढ़ना बेहतर समझ और दुआ में तवज्जो के लिए मुफ़ीद है।


नतीजा (Conclusion)

Surah Baqarah last 2 ayat सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि ईमान के उसूलों का ख़ुलासा और अल्लाह से माँगी गई सबसे जामे दुआ हैं। रोज़ रात को इन्हें पढ़ना एक आसान लेकिन बेहद बाबरकत सुन्नत है। अगर आप इन आयतों को साथ रखना चाहते हैं तो नीचे दिए गए PDF को डाउनलोड करें और जब चाहें, बिना इंटरनेट के भी पढ़ सकें।

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